Ziyarat E Nahiya In Hindi Guide

इसे पढ़ने का सबसे उत्तम समय "अरबाeen" (चेहल्लुम) माना जाता है, जो इमाम हुसैन की शहादत के ४० दिन बाद आता है। हालांकि, इसे किसी भी समय और किसी भी स्थान से पढ़ा जा सकता है, लेकिन कर्बला में इमाम के रौज़े के बिल्कुल पास (नाहिया) खड़े होकर पढ़ने का विशेष महत्व है।

ज़ियारत-ए-नाहिया एक महत्वपूर्ण शिया मुस्लिम तीर्थयात्रा है, जो इमाम हुसैन के मकबरे पर जाकर की जाती है। यह यात्रा कर्बला, इराक में स्थित है और शिया मुसलमानों के लिए बहुत पवित्र मानी जाती है। ज़ियारत-ए-नाहिया के दौरान, श्रद्धालु इमाम हुसैन के मकबरे पर जाकर प्रार्थना करते हैं और उनके शहीदी की याद में शोक मनाते हैं। यह यात्रा शिया मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है, जिसमें वे अपने इमाम के शहीदी की याद में शोक मनाते हैं और उनके परिवार के साथ हुए अन्याय के लिए विलाप करते हैं। ziyarat e nahiya in hindi

मौलाना की बात ख़त्म होते ही अली की हिचकियाँ बँध गईं। उसे ऐसा लगा जैसे कर्बला की तपती रेत उसकी आँखों के सामने हो। उसने महसूस किया कि ज़ियारत-ए-नाहिया सिर्फ़ पढ़ने की चीज़ नहीं, बल्कि इमाम महदी (अ.स.) के उस गहरे दर्द को महसूस करने का जरिया है जो वह हर रोज़ अपने दिल में छुपाए हुए हैं। ziyarat e nahiya in hindi

इमाम बयान करते हैं कि जब ज़ालिमों ने इमाम हुसैन (अ.स.) को चारों तरफ़ से घेर लिया था, जब उनके जिस्म पर तीरों की बारिश हो रही थी और वह घोड़े की जीन से ज़मीन पर आ रहे थे, तो उस वक़्त का मंज़र कितना भयानक था! इमाम महदी (अ.स.) कहते हैं कि हुसैन (अ.स.) के जिस्म को घोड़ों की टापों से रौंदा गया।" ziyarat e nahiya in hindi

आप ज़ियारत-ए-नाहिया का पूरा हिंदी अनुवाद और पाठ निम्नलिखित विश्वसनीय स्रोतों पर देख सकते हैं:

ज़ियारत में इमाम हुसैन के गुणों का वर्णन है, जैसे उनकी न्यायप्रियता, अनाथों के लिए उनकी दया और दीन (धर्म) की रक्षा के लिए उनका अटूट संकल्प。